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बीजीय व्यंजक क्या होते हैं? | Algebraic expression kya hote hai?

नमस्कार दोस्तों इस लेख में हम जानेंगे कि बीजीय व्यंजक (algebraic expression) क्या होते हैं? तथा हम जानेंगे कि बीजीय व्यंजकों का योग, व्यकलन, गुणन तथा भाग कैसे करते हैं? तथा इससे जुड़े हुए अनेक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

व्यंजक क्या है?

व्यंजकों (algebraic expression) का निर्माण चर पद तथा अचर पदों की सहायता से बनाया जाता है अर्थात् यदि चर पद तथा अचर पदों को मिलाकर लिखा जाता है तो इसको व्यंजक कहा जाता है। इसको उदाहरण की सहायता से समझा जा सकता है।

उदाहरण : 2x – 5 इसमें 2x चर पद है तथा 2 अचर पद है। तथा 2x -5 व्यंजक कहा जाता है। तथा इसमें x का मान कुछ भी हो सकता है जैसा कि x = 1, 2, 3, 4,……….

पद, गुणनखंड एवं गुणांक क्या होते हैं?

व्यंजक (algebraic expression) पदों को मिलाकर बनाया जाता है। पद स्वयं भी गुणनखंडों के गुणनफल के रुप में बनाए जा सकते हैं। किसी पद का संख्यात्मक गुणनखंड उसका संख्यात्मक गुणांक या गुणांक कहलाता है।

उदाहरण: पद 6y में 6 तथा y के गुणनफल से मिलकर बना है। तथा 6y में 6 गुणांक है।

एकपदी द्विपदी एवं बहुपद किसे कहते हैं?

जिस व्यंजक में एक पद होता है उसे “एकपदी” कहलाता है। उदाहरण: 6x², 3xy, -7x

जिस व्यंजक में दो पद होते हैं उसे “द्विपदी” कहलाता है। उदाहरण: a + b , 4x + y, 3z – y

जिस व्यंजक में तीन पद होते हैं उसे “त्रिपदी” कहलाता है। उदाहरण: a+b+c, 3x – 2y + 4z,

एक से अधिक पदों वाला व्यंजक जिसके गुणांक शून्येतर हो और जिसके चारों की घात ऋणेतर पूर्णांक हो उसे “बहुपद” कहलाता है। उदाहरण: a +b + c + d, 3x + 2y – 3z + 7u

बीजीय व्यंजकों (algebraic expression) के योग एवं व्यकलन कैसे करते हैं?

बीजीय व्यंजक (algebraic expression) दो पदों (चर तथा अचर) से मिलकर बना होता है। यदि इनका योग व्यकलन किया जाता है तो इसमें समान चर पद को समान चर पद से जोड़ा या घटाया जाता है तथा अचर पद को अचर पद के साथ जोड़ा या घटाया जाता है। इसे उदाहरण की सहायता से समझते हैं।

उदाहरण: 2x + 5 तथा 3x – 7 दो व्यंजक है इनका योग तथा व्यकलन करो?

हल : इन व्यंजकों में चर पद 2x 3x है तथा 5 तथा – 7 अचर पद हैै।

योग : (2x + 3x) + {5 + (-7)} = 5x + (-2) = 5x – 2

व्यकलन: (2x – 3x) + {5 – (-7)} = -x + (5 + 7) = -x + 12

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  • व्यंजक बनाने के लिए पदों को में होता है। स्वयं पदों का निर्माण गुणनखंडों के गुणनफल के रूप पदों को जोड़ा जाता है।
  • व्यंजक जिनमें एक , दो तथा तीन पद होते हैं क्रमश : एकपदी , द्विपदी और त्रिपदी कहलाते हैं। सामान्यतः एक अथवा अधिक पदों वाला व्यंजक जिसमें पदों के गुणांक शून्येतर पूर्णांक हैं और चरों की घात ऋणेतर है , बहुपद कहलाता है।
  • समान चरों से समान पद बनते हैं , और इन चरों की घात भी समान होती है । समान पदों के गुणांक समान होने आवश्यक नहीं है।
  • बहुपदों को जोड़ने ( अथवा घटाने ) के लिए सबसे पहले समान पदों को ढूंढ़िए और उन्हें जोड़ ( अथवा घटा ) दीजिए , उसके पश्चात् असमान पदों को उपयोग में लीजिए।
  • बहुत सी परिस्थितियों में हमें बीजीय व्यंजकों को गुणा करने की आवश्यकता होती है । उदाहरणार्थ आयत का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए , जिसकी भुजाएँ बीजीय व्यंजकों के रूप में दी हुई हैं।
  • एकपदी को एकपदी से गुणा करने पर हमेशा एकपदी प्राप्त होता है।
  • बहुपद को एकपदी से गुणा करने के लिए बहुपद का प्रत्येक पद एकपदी से गुणा किया जाता है । बहुपद का द्विपद ( अथवा त्रिपद ) से गुणन करने के लिए हम एक पद को एक – एक पद से गुणा करते हैं , अर्थात् बहुपद का प्रत्येक पद द्विपद ( अथवा त्रिपद ) के प्रत्येक पद से गुणा किया जाता है। ध्यान दीजिए इस प्रकार के गुणन में हमें गुणनफल में समान पद प्राप्त हो सकते हैं और उन्हें मिलाना पड़ सकता है।

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